Chapter 6Malhar

Chapter 6

Read official chapter content, important formulas, and quick notes below.

Chapter 6

Chapter Overview & Structural Roadmap

  • काव्य खंड (Poetry Section): कक्षा 7 की हिंदी पाठ्यपुस्तक "मल्हार" का अध्याय 6 महान रीतिमुक्त कवि गिरिधर कविराय की दो प्रसिद्ध कुंडलियों पर आधारित है। इन कुंडलियों के माध्यम से कवि ने मानव जीवन के दो अत्यंत महत्वपूर्ण नैतिक सिद्धांतों को समझाया है—पहला, बिना सोचे-समझे किए गए कार्यों के बुरे परिणाम और समाज में उपहास का पात्र बनना; और दूसरा, अतीत की असफलताओं को त्यागकर सकारात्मक रूप से भविष्य की ओर अग्रसर होना।
  • कवि परिचय (Introduction to the Poet): 18वीं शताब्दी के प्रख्यात कवि गिरिधर कविराय अपनी व्यावहारिक नीति, सीधी-सादी भाषा और लोक-उपयोगी उपदेशों के लिए जाने जाते हैं। उनकी कुंडलियाँ छंद की दृष्टि से एक विशिष्ट रूप होती हैं जहाँ रोला और कुण्डलिया छंद का अनूठा सामंजस्य देखने को मिलता है।
  • पाठ-बोध और विश्लेषण (Textual Comprehension & Analysis): कुंडलियों की प्रत्येक पंक्ति का गहन विश्लेषण, कठिन शब्दों के अर्थ, तथा काव्य-सौंदर्य का अध्ययन।
  • व्यावहारिक शिक्षा और साइबर सुरक्षा (Practical Education & Cyber Safety): डिजिटल युग के परिप्रेक्ष्य में आज के छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी (लॉटरी, केवाईसी, बैंक फ्रॉड आदि) से सचेत रहने की व्यावहारिक सीख।
  • भाषा कौशल और व्याकरण (Language Skills & Grammar): काल से जुड़े शब्द (भूतकाल, वर्तमान काल, भविष्य काल) और रचनात्मक गतिविधियाँ।

Learning Objectives

  • विद्यार्थियों को मध्यकालीन रीतिकाल के नीतिपरक साहित्य और कवि गिरिधर कविराय की काव्य शैली से परिचित कराना।
  • कुंडलियों की संरचना (दोहा और रोला छंद के मेल से बनने वाली कुंडलिया) और उसके लयबद्ध पाठन को समझना।
  • बिना विचारे कार्य करने के दुष्परिणामों को समझकर जीवन में विवेकशीलता (Wisdom and Prudence) को अपनाना।
  • अतीत के दुखों से सीख लेकर भविष्य में सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की मानसिकता विकसित करना।
  • आधुनिक संदर्भों में पाठ की प्रासंगिकता को समझना, विशेषकर डिजिटल सुरक्षा और व्यावहारिक लोक-व्यवहार के क्षेत्र में।

Important Concepts

  • विवेकपूर्ण निर्णय (Prudent Decision Making): कवि गिरिधर कविराय स्पष्ट करते हैं कि जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे (बिना विचारे) कोई कार्य करता है, उसका अपना काम तो बिगड़ता ही है, साथ ही वह समाज में हँसी का पात्र भी बनता है (जग में होत हँसाय)। मन में सदा अशांति बनी रहती है और उत्तम खान-पान भी उसे सुख नहीं दे पाता।
  • अतीत का विस्मरण और भविष्य की सुधि (Forgetting the Past, Focusing on the Future): दूसरी कुंडली में कवि उपदेश देते हैं कि जो बीत गया (अतीत), उसे भुला देना चाहिए और आने वाले कल (भविष्य) की चिंता करनी चाहिए। जो कार्य सहजता से और सरलता से संभव हो, उसी में अपना ध्यान लगाना चाहिए और मन को प्रभु के अनुशासन व विवेक पर विश्वास रखना चाहिए।
  • लोक-व्यवहार और नैतिकता (Social Etiquette and Ethics): कविता केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण जीवन दर्शन है जो ग्रामीण और शहरी दोनों परिवेश के मनुष्यों को सही आचरण सिखाता है।
  • सांस्कृतिक और साहित्यिक विस्तार: (नोट: पूर्ववर्ती प्रारूप में उल्लिखित मुंशी प्रेमचंद की कहानी "मल्हार" इस पाठ का हिस्सा नहीं है; पाठ्यक्रम के अनुसार यह अध्याय पूरी तरह से गिरिधर कविराय की कुंडलियों पर आधारित नीतिपरक काव्य है)।

Key Definitions

TermMeaning
कुंडलिया (Kundaliya)यह एक मात्रिक छंद है जो दोहा और रोला के मेल से बनता है। इसकी विशेषता यह होती है कि जिस शब्द से यह आरंभ होता है, उसी शब्द पर इसका समापन भी होता है।
बिना विचारे (Bina Vichare)बिना किसी पूर्व विचार, योजना या परिणाम की परवाह किए बिना कोई कार्य करना।
जग हँसाय (Jag Hansay)समाज या दुनिया द्वारा किसी मूर्खतापूर्ण कार्य पर हँसा जाना अथवा उपहास का पात्र बनना।
बीती ताहि बिसार दे (Beeti Tahi Bisar De)बीते हुए समय, गलतियों या दुखों को अपने मन से पूरी तरह निकाल देना या भुला देना।
सुधि लेइ (Sudhi Lei)आने वाले समय या भविष्य के लिए सचेत रहना और उसकी योजना बनाना।

Detailed-Dive Case Studies and Real-Life Applications

  • केस स्टडी 1: आवेश में लिया गया निर्णय और उसका परिणाम
    • परिस्थिति: सातवीं कक्षा का एक छात्र रोहित अपनी परीक्षा की तैयारी बिना किसी योजना के अंतिम रात में करता है और हड़बड़ी में गलत तरीके से पाठ्यक्रम याद करने की कोशिश करता है। परिणामस्वरूप, परीक्षा में उसके अंक बहुत कम आते हैं और वह कक्षा में शर्मिंदा होता है।
    • विश्लेषण: यह घटना ठीक गिरिधर कविराय की पहली कुंडली "बिना विचारे जो करे, सो पाछ पछताय" को चरितार्थ करती है। बिना सोचे-समझे उठाया गया कदम हमेशा असफलता और मानसिक तनाव लाता है।
  • केस स्टडी 2: डिजिटल युग में सावधानी (Cyber Safety Real-Life Application)
    • परिस्थिति: आज के डिजिटल दौर में कई बार लोग बिना सोचे-समझे किसी अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं या अपनी बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है।
    • सीख: पाठ के व्यावहारिक संदेश से यह प्रेरणा मिलती है कि इंटरनेट का उपयोग करते समय हमेशा सतर्क रहना चाहिए, किसी भी लुभावने संदेश (जैसे लॉटरी या फ्री गिफ्ट) के झांसे में नहीं आना चाहिए, और यदि कभी कोई गलती हो भी जाए तो उससे सीख लेकर भविष्य में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

Step-by-Step Problem Solving Strategies & Poetic Analysis

  • चरण 1: संदर्भ प्रसंग सहित व्याख्या (Contextual Explanation Strategy)
    • जब भी परीक्षा में काव्य की पंक्तियाँ (जैसे "बिना विचारे जो करे...") पूछी जाएं, तो पहले उनका संदर्भ (कवि और पाठ का नाम) लिखिए।
    • फिर प्रसंग लिखिए कि कवि क्या संदेश देना चाहता है।
    • अंत में सरल शब्दों में उसका विस्तृत अर्थ स्पष्ट कीजिए।
  • चरण 2: छंद और तुकबंदी पहचानना
    • कुंडलिया छंद की संरचना को समझें: प्रथम दो पंक्तियाँ दोहे की होती हैं और बाद की चार पंक्तियाँ रोला की होती हैं।

Higher-Order Thinking Skills (HOTS) Questions

  • प्रश्न 1: कवि गिरिधर कविराय ने यह क्यों कहा है कि बिना विचारे काम करने से उत्तम खान-पान भी अच्छा नहीं लगता?
    • उत्तर: जब मनुष्य कोई मूर्खतापूर्ण या बिना सोचे-समझे कार्य करता है, तो उसके मन में निरंतर अपराधबोध और असफलता का तनाव बना रहता है। मानसिक अशांति और आत्मग्लानि के कारण व्यक्ति को स्वादिष्ट भोजन या भौतिक सुख भी आनंद नहीं दे पाते।
  • प्रश्न 2: "बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेइ" इस पंक्ति के दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक महत्व को स्पष्ट कीजिए।
    • उत्तर: मनोविज्ञान के अनुसार, अतीत के दुखों में उलझे रहने से वर्तमान भी खराब हो जाता है। यह पंक्ति हमें यह सिखाती है कि पिछली असफलताओं को केवल एक सीख के रूप में लेना चाहिए और अपनी ऊर्जा को भविष्य को संवारने में लगाना चाहिए।

Previous Year Questions (PYQs) with Solutions

  • प्रश्‍न 1: "जग में होत हँसाय" पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। (वार्षिक परीक्षा)
    • उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि जब कोई व्यक्ति बिना सोचे-समझे कोई गलत या अदूरदर्शी कार्य करता है, तो समाज के लोग उस पर हँसते हैं और उसकी मूर्खता का उपहास उड़ाते हैं, जिससे उस व्यक्ति और उसके परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचती है।
  • प्रश्‍न 2: कवि गिरिधर कविराय के अनुसार हमें अपने मन को क्या समझाना चाहिए?
    • उत्तर: कवि के अनुसार हमें अपने मन को यह समझाना चाहिए कि जो बीत चुका है, उसे बदला नहीं जा सकता; इसलिए दुख को छोड़कर भविष्य की खुशियों के बारे में सोचें और जो कार्य सहजता से संभव हो, उसी में अपना मन लगाएं।

Key Points to Remember

  • पाठ 6 "गिरिधर कविराय की कुंडलियाँ" नीतिपरक शिक्षाओं से भरपूर काव्य है।
  • पहली कुंडली बिना सोचे-समझे कार्य करने के दुष्परिणाम और समाज में होने वाले अपमान को दर्शाती है।
  • दूसरी कुंडली अतीत की भूलों को भुलाकर भविष्य की चिंता करने और सहज मार्ग पर चलने का संदेश देती है।
  • कुंडलिया छंद की यह विशेषता होती है कि वह जिस शब्द से शुरू होती है, उसी पर समाप्त होती है।
  • यह अध्याय छात्रों को नैतिक मूल्यों के साथ-साथ डिजिटल जीवन में सावधानी बरतने की व्यावहारिक सीख भी देता है।

Common Mistakes

  • भ्रम की स्थिति: छात्र इस अध्याय को मुंशी प्रेमचंद की किसी कहानी (जैसे पूर्ववर्ती गलत प्रारूप में उल्लेखित "मल्हार") से भ्रमित न करें; यह पूरी तरह से गिरिधर कविराय की नीतिपरक कुंडलियाँ हैं।
  • अर्थ का अनर्थ: "बीती ताहि बिसार दे" का अर्थ सब कुछ भूलकर लापरवाह हो जाना नहीं है, बल्कि पिछली असफलताओं के तनाव से मुक्त होकर आगे की तैयारी करना है।

Quick Revision

  • कवि: गिरिधर कविराय (18वीं सदी के नीतिसिद्ध कवि)।
  • मुख्य संदेश 1: बिना विचारे काम करने से काम बिगड़ता है, मन में चैन नहीं रहता और जग में हँसी होती है।
  • मुख्य संदेश 2: बीती बातों को भुलाकर आगे की सुधि लेनी चाहिए और सहज कार्य में चित्त लगाना चाहिए।
  • व्यावहारिक पक्ष: ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों से बचने के लिए सतर्कता अति आवश्यक है।
  • व्याकरण: काल के तीन भेद (भूतकाल, वर्तमान काल, भविष्य काल) का अभ्यास।

Chapter Summary

कक्षा 7 की हिंदी पाठ्यपुस्तक "मल्हार" का अध्याय "गिरिधर कविराय की कुंडलियाँ" भारतीय लोक-संस्कृति और नीति-साहित्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। कवि गिरिधर कविराय ने अपनी कुंडलियों के माध्यम से बहुत ही सरल, सहज और प्रभावी शैली में जीवन के दो शाश्वत सत्यों को उजागर किया है। प्रथम कुंडली में उन्होंने आगाह किया है कि जो मनुष्य बिना किसी विचार या योजना के कार्य करता है, वह अंत में पछताता है, उसका मन अशांत रहता है और समाज उसका उपहास उड़ाता है। दूसरी कुंडली में वे सांत्वना और प्रेरणा देते हुए कहते हैं कि जो समय बीत चुका है, उस पर पछताने से कुछ नहीं मिलने वाला; अतः भूतकाल के दुखों को बिसारकर भविष्य को संवारने पर ध्यान देना चाहिए और सहजता से मिलने वाले सत्यों में संतोष रखना चाहिए। यह कविता छात्रों को न केवल नैतिक रूप से सबल बनाती है, बल्कि उन्हें डिजिटल युग की चुनौतियों और व्यावहारिक जीवन की सच्चाइयों से भी अवगत कराती है।


NCERT Textbook Questions & Detailed Answers

(क) "मेरी समझ से" (MCQ के उत्तर और विस्तृत व्याख्या)

(1) "बिना विचारे" काम करने के क्या परिणाम होते हैं?

  • उत्तर: अपना काम बिगड़ जाता है और मन अशांत रहता है।
  • विस्तृत स्पष्टीकरण: जब हम बिना सोचे-समझे कोई कार्य करते हैं, तो उसकी सफलता की संभावना नगण्य हो जाती है, जिससे कार्य बिगड़ जाता है।

(2) "चित्त में चैन" न पा सकने का मुख्य कारण क्या है?

  • उत्तर: बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता और उसके कारण उत्पन्न होने वाला पछतावा।
  • विस्तृत स्पष्टीकरण: मन की शांति तभी भंग होती है जब हमारे किए गए कार्य का परिणाम हमारे और समाज के विपरीत पड़ता है।

(3) "बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेइ" पंक्ति द्वारा कौन-सी सलाह दी गई है?

  • उत्तर: अतीत की असफलताओं और दुखों को पूरी तरह भुलाकर भविष्य की योजना बनाने और आगे बढ़ने की सलाह दी गई है।
  • विस्तृत स्पष्टीकरण: यह पंक्ति हमें निराशावादी सोच से निकालकर आशावादी और कर्मठ बनने की प्रेरणा देती है।

(4) "जो बिन आवै सहज में ताही में चित देइ" पंक्ति का क्या अर्थ है?

  • उत्तर: जो कार्य सरलता और सहजता से संभव हो, मनुष्य को अपना ध्यान उसी में केंद्रित करना चाहिए, न कि कठिन और अनिश्चित रास्तों पर भटकना चाहिए।

(ख) "मिलकर करें मिलान" (स्तंभ 1 का स्तंभ 2 से विस्तृत मिलान)

  1. जग में होत हँसाय...
    • मिलान/अर्थ: बिना विचार के किए गए कार्य के कारण मन अशांत रहता है। समाज में उपहास होता है और अच्छा खान-पान भी उस व्यक्ति को सुख नहीं दे पाता।
  2. कह गिरिधर कविराय...
    • मिलान/अर्थ: जो कार्य बिना विचार किए किया जाता है, वह लंबे समय तक मन में खटकता रहता है और उस मानसिक पीड़ा से छुटकारा पाना बहुत कठिन होता है।
  3. ताही में चित देइ...
    • मिलान/अर्थ: ऐसे कार्य कीजिए कि किसी बुरे या विरोधी व्यक्ति को हँसने का मौका न मिले और मन में किसी प्रकार का अपराधबोध न हो।
  4. कह गिरिधर कविराय यहै करु...
    • मिलान/अर्थ: अपने मन को इस बात पर विश्वास करना सिखाओ कि भविष्य की खुशी को समझते हुए अतीत के दुखों को भुलाकर आगे बढ़ना ही बुद्धिमत्ता है।

(ग) काल से जुड़े शब्द और उनका व्याकरणिक विश्लेषण

पाठ्यपुस्तक के आधार पर काल (Tense) के तीनों रूपों के उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  • भूतकाल (Past Tense):
    • उदाहरण 1: कल मैं विद्यालय गया था।
    • उदाहरण 2: उसने बिना सोचे-समझे पिछला कार्य किया था।
  • वर्तमान काल (Present Tense):
    • उदाहरण 1: आज हम हिंदी की पाठ्यपुस्तक पढ़ रहे हैं।
    • उदाहरण 2: कवि गिरिधर की कुंडलियाँ हमें नीति सिखा रही हैं।
  • भविष्य काल (Future Tense):
    • उदाहरण 1: कल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए मैं कठिन परिश्रम करूँगा।
    • उदाहरण 2: हम भविष्य में कभी भी बिना सोचे-समझे कोई निर्णय नहीं लेंगे।

Pro Tip for this Chapter

Ensure you practice the in-text questions provided in the official NCERT PDF. If you find any topic difficult, review the formulas and concepts highlighted above. For advanced doubts, join our classroom coaching in Begusarai.